Raag Pahadi cover art

Raag Pahadi

Preview
Subscribe now Free with 30-day trial
Offer ends on 14 April, 2026 at 23:59.
Prime logo
Pay ₹5/month for 2 months and ₹199/month after 2 months, Cancel anytime. Offer ends on 14 April 2026 at 23:59. Take this offer!
1 credit a month to use on any title to download and keep.
Listen to anything from the Plus Catalogue—thousands of Audible Originals, podcasts and audiobooks.
Download titles to your library and listen offline.
1 credit a month to use on any title to download and keep
Listen to anything from the Plus Catalogue—thousands of Audible Originals, podcasts and audiobooks
Download titles to your library and listen offline
₹199 per month after 30-day trial. Cancel anytime.

Raag Pahadi

Written by: Namita Gokhale, Pushpesh Pant - translator
Narrated by: Neha Rai
Subscribe now Free with 30-day trial

Pay ₹5/month for 2 months and ₹199/month after 2 months, Cancel anytime. Offer ends on 14 April 2026 at 23:59.

₹199 per month after 30-day trial. Cancel anytime.

Buy Now for ₹769.00

Buy Now for ₹769.00

LIMITED TIME OFFER | Get 2 Months for ₹5/month

About this listen

राग पहाड़ी' का देशकाल, उन्नीसवीं सदी के मध्य से लेकर बीसवीं सदी से पहले का कुमाऊँ है। कहानी शुरू होती है लाल-काले कपड़े पहने ताल के चक्कर काटती छह रहस्यमय महिलाओं की छवि से जो किसी भयंकर दुर्भाग्य का पूर्वाभास कराती हैं। इन प्रेतात्माओं ने यह तय कर रखा है कि वह नैनीताल के पवित्र ताल को फिरंगी अंग्रेजों के प्रदूषण से मुक्त कराने की चेतावनी दे रही हैं। इसी नैनीताल में अनाथ तिलोत्तमा उप्रेती नामक बच्ची बड़ी हो रही है। जिसके चाचा को 1857 वाली आज़ादी की लड़ाई में एक बाग़ी के रूप में फाँसी पर लटका दिया गया था। कथानक तिलोत्तमा के परिवार के अन्य सदस्यों के साथ-साथ देशी-विदेशी पात्रों के इर्द-गिर्द भी घूमता है जिसमें अमेरिकी चित्रकार विलियम डैम्पस्टर भी शामिल है जो भारत की तलाश करने निकला है। तिलोत्तमा गवाह है उस बदलाव की जो कभी दबे पाँव तो कभी अचानक नाटकीय ढंग से अल्मोड़ा समेत दुर्गम क़स्बों, छावनियों और बस्तियों को बदल रहा है, यानी एक तरह से पूरे भारत को प्रभावित कर रहा है। परम्परा और आधुनिकता का टकराव और इससे प्रभावित कभी लाचार तो कभी कर्मठ पात्रों की जि़न्दगियों का चित्रण बहुत मर्मस्पर्शी ढंग से इस उपन्यास में किया गया है जिसका स्वरूप 'राग पहाड़ी' के स्वरों जैसा है। चित्रकारी के रंग और संगीत के स्वर एक अद्भुत संसार की रचना करते हैं जहाँ मिथक-पौराणिक, ऐतिहासिक-वास्तविक और काल्पनिक तथा फंतासी में अन्तर करना असम्भव हो जाता है। यह कहानी है शाश्वत प्रेम की, मिलन और विछोह की, अदम्य जिजीविषा की।©2021 Storyside IN (P)2021 Storyside IN Action & Adventure
No reviews yet