Deewan-E-Mir cover art

Deewan-E-Mir

Preview
Free with 30-day trial
Prime logo New to Audible Prime Member exclusive:
2 credits with free trial
1 credit a month to use on any title to download and keep
Listen to anything from the Plus Catalogue—thousands of Audible Originals, podcasts and audiobooks
Download titles to your library and listen offline
₹199.00 per month after 30-day trial. Cancel anytime.

Deewan-E-Mir

Written by: Mir Taqi Mir
Narrated by: Fauzia Dastango
Free with 30-day trial

₹199.00 per month after 30-day trial. Cancel anytime.

Buy Now for ₹377.22

Buy Now for ₹377.22

मीर तक़ी मीर भारतीय कविता के उन बड़े नामों में से हैं, जिन्होंने लोगों के दिलो-दिमाग़ में स्थान बनाया हुआ है। अपनी शायरी को दर्द और ग़म का मज़मूआ बताते हुए मीर ने यह भी कहा है कि मेरी शायरी ख़ास लोगों की पसन्द की ज़रूर है, लेकिन 'मुझे गुफ़्तगू अवाम से है।' और अवाम से उनकी यह गुफ़्तगू इश्क की हद तक है। इसलिए उनकी इश्किया शायरी भी उर्दू शायरी के परम्परागत चौखटे में नहीं अँट पाती। इन्सानों से प्यार करके ही वे ख़ुदा तक पहुँचने की बात करते हैं, जिससे इस राह में मुल्ला-पंडितों की भी कोई भूमिका नज़र नहीं आती। यही नहीं, मीर की अनेक ग़ज़लों में उनके समय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों तथा व्यक्ति और समाज की आपसी टकराहटों को भी साफ़ तौर पर रेखांकित किया जा सकता है, जो उन्हें आज और भी अधिक प्रासंगिक बनाती हैं। दरअसल मीर की शायरी भारतीय कविता, ख़ास कर हिन्दी-उर्दू की साझी सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा सबूत है, जो उनकी रचनाओं के लोकोन्मुख कथ्य और आम-फहम गंगा-जमुनी भाषायी अंदाज़ में अपनी पूरी कलात्मक ऊँचाई के साथ मौजूद है।©2021 Storyside IN (P)2021 Storyside IN Asian Poetry World Literature
adbl_web_anon_alc_button_suppression_t1
No reviews yet