Amar sharda sinha ji cover art

Amar sharda sinha ji

Amar sharda sinha ji

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जब उगता सूरज हँसकर बोले,

जब अर्घ्य में विश्वास डोले,

उस उजास में जो स्वर समाया,

वो शारदा का गीत कहलाया…


केलवा के पात पर, खुशियों का गीत सजे,

शारदा के सुर में, छठ के रंग रचे।

पहिले पहिल छठी मैया, व्रत की धुन लहराए,

उग हो सुरज देव, सारा जग झूम जाए!


समस्तीपुर की माटी हँसी, सुरों ने पंख लगाए,

माँ की लोरी, नानी की कथा, गीत बनकर आए।

शास्त्र की रेखा, लोक की खुशबू,

हर आवाज़ में बस गया बिहार का जादू।


सत्तर में जब पहला सुर मुस्काया,

“उग हो सुरज देव” ने मन को नचाया।

सादा जीवन, ऊँची उड़ान,

शारदा नाम बना पहचान।



हो दीनानाथ, आज आसमान झूमे,

शारदा के गीतों में, हर सपना झूमे।

केलवा के पात पर, दीपों की कतार,

बिहार कोकिला गाए, खुशियों की बहार!


सिहमा गाँव की गलियों से,

गीत चले दुनिया सारी।

मैथिली, भोजपुरी, मगही में,

भक्ति लगी सबसे प्यारी।


ना शोहरत की चाह, ना मंच का शोर,

बस छठी मैया और सुरों का डोर।

करोड़ों दिलों की एक ही पुकार—

शारदा के बिना छठ अधूरा यार!


जो सच्चे मन से गाए,

वो कभी हार न पाए।

जो भक्ति को जीवन बनाए,

वो अमर कहलाए।

शारदा ने सिखाया यही—

सुरों से भी रोशनी आए।



केलवा के पात पर, सूरज ताली बजाए,

शारदा की धुन में, हर दिल नाच जाए।

पहिले पहिल छठी मैया, आज भी बुलाए,

बिहार कोकिला अमर, युग-युग मुस्काए!


पाँच नवंबर आया, आँखें नम हुईं,

पर सुरों की धूप कभी कम न हुई।

देह गई, पर आवाज़ रही,

हर छठ सवेरा में शारदा बसी।


गाओ, नाचो, अर्घ्य सजाओ,

शारदा के गीतों में छठ मनाओ।

सुर, श्रद्धा और मुस्कान—

vikkindiaevents hamesha बिहार कोकिला को kareh शत-शत प्रणाम × 3

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