फोर्टिफाइड चावल - क्यों आदिवासी किसान सरकार द्वारा प्रचारित इस नए चावल को स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं?
Failed to add items
Add to cart failed.
Add to wishlist failed.
Remove from wishlist failed.
Follow podcast failed
Unfollow podcast failed
-
Narrated by:
-
Written by:
सरकार राशन के चावल में अब उन्हें “फ़ॉर्टिफ़ायड चावल" मिला कर दे रही हैं। सराकर का दावा है की यह चावल विटामिन और आयरन का पाउडर के चूरे को मिला कर फ़ैक्टरी में तैय्यार किया गया हे। यह चावाल खून की कमी और कुपोषण को ठीक करने में मदद करेगा। डॉक्टर और वैज्ञानिको में अभी तक इस पर सहमति नहीं हैं। यह तीन हज़ार करोड़ के बजट की नयी नीति कितनी कामगार होगी, इस पर लोगों में अभी संदेह हे।
“बात मुलाक़ात” के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अनुमेहा यादव ने उड़ीसा व झारखंड के किसानों से बातचीत की। गाँव में आदिवासी किसान जो खुद सदियों से धान उगाते आए हैं बताते हैं की वह इस तरीके से पोषण को ठीक करने का सही तरीका नहीं मानते। वह कहते हैं “फ़ॉर्टिफ़ायड चावल" में खाने के गुण, जैसे की पकाने पर चावाल का गाच (स्वाभाविक गोंद) और उसका स्वाद सामान्य चावाल जैसा नहीं ह। गाओं के लोग इस तरह के चावल को पसंद नहीं करते और इसे बाकि खाने से अलग कर देते हैं।
धान व अन्य खाने में पोषण कम होने का कारण तेज़ी से लुप्त होती बीज विविधता और धान को फ़ैक्टरी में सफ़ेद से सफ़ेद बानाने की औद्योगिक क्रम और जल वायु परिवर्तन है। जहां रासायनिक खाद आदि से खेती बदल रही है, वहीं कुछ आदिवासी किसान सूनो इंडिया को बताते हैं की वह पारम्परिक भोजन व बीज बचाने की कोशश भी कर रहें हैं, ताकि पोषण, स्वाद और पर्यावरण बने रहें।
See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.