शून्य से नहीं, अनुभव से शिखर तक (From Evidence to Excellence) cover art

शून्य से नहीं, अनुभव से शिखर तक (From Evidence to Excellence)

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यह पॉडकास्ट के लिए एक विस्तृत, प्रभावशाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर भाषण है। इसमें भास्कर योगाचार्य की शैली, ऋषिकेश की जड़ों का प्रभाव और योगिक दर्शन का समावेश किया गया है।वक्ता: भास्कर योगाचार्यमेरे प्रिय साधकों और जीवन-पथ के यात्रियों,आज मैं आपसे उस थकान के बारे में बात करना चाहता हूँ जो शरीर की नहीं, आत्मा की है। क्या आप जानते हैं कि आप आज इतना थका हुआ क्यों महसूस कर रहे हैं? क्या इसलिए कि रास्ता बहुत लंबा है? क्या इसलिए कि मंज़िल अभी भी बहुत दूर है?नहीं। योग दर्शन कहता है कि थकान मार्ग की लंबाई से नहीं, बल्कि स्मृति के अभाव (Loss of Memory) से आती है। आप इसलिए थक गए हैं क्योंकि आप भूल गए हैं कि आप कितनी दूर आ चुके हैं। आप केवल उस शिखर को देख रहे हैं जो अभी पाना बाकी है, लेकिन आपने उन पहाड़ों को देखना छोड़ दिया है जिन्हें आप पहले ही लाँघ चुके हैं।क्षितिज को घूरना बंद करें। अपने पैरों के नीचे की भूमि को देखें। आपके पैरों के ये छाले, ये फटी हुई उंगलियां और आपकी सांसों की ये तेज़ी—ये कमजोरी की निशानी नहीं हैं। ये प्रमाण (Evidence) हैं। ये सबूत हैं कि आप लड़ रहे हैं, आप चल रहे हैं, और आप बढ़ रहे हैं।निर्माता बनाम याचक (The Builder vs. The Beggar)अध्यात्म में एक बहुत ही सूक्ष्म सत्य है—'जैसा भाव, वैसी सिद्धि।'जब आप अपने जीवन को 'अभाव' (Lack) की दृष्टि से देखते हैं, जब आप केवल उसे देखते हैं जो आपके पास नहीं है, तो आप एक 'भिखारी' की तरह चलते हैं। आप ब्रह्मांड से भीख मांगते हैं कि "मुझे थोड़ा और दे दो, मैं अभी अधूरा हूँ।" लेकिन जब आप अपने 'प्रमाणों' को लेकर चलते हैं, अपनी छोटी-छोटी जीतों को याद रखते हैं, तो आप एक निर्माता (Builder) की तरह चलते हैं।निर्माता कभी किसी का पीछा नहीं करता। निर्माता चयन (Choose) करता है। वह अपनी ऊर्जा की ईंटों से अपने भाग्य का महल बनाता है। आज हमें अपनी दृष्टि का लेंस बदलना है। हताशा से प्रभुत्व की ओर, कल्पना से तथ्यों की ओर। आपके अपने तथ्य।चेतना का विज्ञान: मोमेंटम लूप (The Momentum Loop)योग मार्ग में हम कहते हैं—'यतो दृष्टि ततो सृष्टि'। यानी आप जहाँ अपना ध्यान केंद्रित करेंगे, वैसी ही आपकी दुनिया बन जाएगी। यह केवल दर्शन नहीं है, यह जीव विज्ञान (Biology) है।यदि आप 'अंतराल' (The Gap) पर ध्यान केंद्रित करेंगे—कि मेरे पास कितना पैसा कम है, मेरा शरीर कितना कमज़ोर है—तो वह अंतराल ...
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