• ईदगाह - मुंशी प्रेमचंद | Eidgah - Premchand.
    Jul 23 2023
    मुंशी प्रेमचंद जी की बहुत प्रसिद्ध कहानी है - ईदगाह। इस कहानी में ग्रामीण मुस्लिम जीवन का सुंदर चित्रण है। कहानी का मुख्य किरदार एक पाँच साल का लड़का हामिद है, जिसके माँ-बाप नहीं है। बस एक दादी है जो किसी तरह छोटा-मोटा काम करके अपने पोते का भरण-पोषण करती है। ईद के दिन हामिद को मेले में जाने के लिए दादी तीन पैसे देती है। भयंकर गरीबी, विषम परिस्थितियाँ छोटे-से हामिद को कितना समझदार बना देती है, इसका सजीव, सुंदर चित्रण किया गया है।
    आइए,सुनते हैं कहानी - ईदगाह
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    35 mins
  • बड़े घर की बेटी - प्रेमचंद | Bade Ghar Ki Beti - Premchand.
    Apr 11 2022
    ठाकुर बेनीमाधव सिंह के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा श्रीकंठ ग्रैजुएट है, नौकरी करता है। दूसरा लालबिहारी, जो कम पढ़ा-लिखा है, पहलवानी का शौक रखता है। छोटा परिवार है। इस सीधे-सादे देहाती गृहस्थ के घर में एक बड़े घर की बेटी, आनंदी, बहू बनकर आती है। वह अपने को इस घर के अनुकूल बना भी लेती है,... पर कुछ ऐसा होता है कि यह परिवार टूटने के कगार पर आ पहुँचता है... पर इसके आगे जो होता हैं वह बड़ा ही दिलचस्प है - तो आइए, यह जानने के लिए सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद जी की प्रसिद्ध कहानी - बड़े घर की बेटी<
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    23 mins
  • बासी भात में ख़ुदा का साझा - प्रेमचंद | Basi bhaat me khuda ka sajha - Premchand.
    Mar 26 2022
    कहानी का मुख्य किरदार है दीनानाथ। बहुत दिनों तक बेकार रहने के बाद जैसे ही उसे नौकरी मिल जाती है, उसकी भगवान के प्रति श्रद्धा और भी बढ़ जाती है। एक दिन उसे एक गलत काम करना पड़ जाता है, जिसके कारण उसे भगवान के दंड का डर सताने लगता है। मन में चल रहा यह द्वंद्व उसे कहाँ ले जाता है ? - जानने के लिए सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी - बासी भात में ख़ुदा का साझा ।
    Munshi Premchand's Story - Basi bhaat me khuda ka sajha.
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    21 mins
  • गरीब की हाय - मुंशी प्रेमचंद | Gareeb Ki Haay - Munshi Premchand.
    Mar 4 2022
    एक सैनिक की गरीब विधवा मूँगा, जो गाँव के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा ठगी जाती है। पर गाँव की पंचायत भी उसे न्याय नहीं दे पाती। कोई भी व्यक्ति उसका साथ नहीं देता। वह बिलकुल ही अकेली पड़ जाती है। उसके साथ हुए विश्वासघात से वह पूरी तरह टूट चुकी थी। पर वह ज़िद्दी थी, अन्याय के ख़िलाफ़ अकेली डटी रही। फिर जो हुआ उसे आप स्वयं सुनिए, मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी - गरीब की हाय
    Munshi Premchand's story - Gareeb Ki Haay.
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    33 mins
  • स्वामिनी - प्रेमचंद | Swamini - Premchand.
    Feb 7 2022
    शिवदास के दो बेटे थे। दोनों बेटों की शादी दो सगी बहनों से हुई - रामप्यारी और रामदुलारी। बड़ी बहू रामप्यारी का पति का देहांत हो जाता है। वह जवानी में विधवा हो जाती है। सास तो थी नहीं। ससुर शिवदास ने घर की जिम्मेदारी रामप्यारी को सौंप दी। प्यारी के घर की स्वामिनी बनने के बाद उसके जीवन में क्या-क्या मोड़ आए, कैसे उसने हालातों का सामना किया..? जानने के लिए सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी - स्वामिनी

    Munshi Premchand's story -
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    40 mins
  • अलग्योझा - मुंशी प्रेमचंद | Algyojha - Premchand.
    Jan 17 2022
    यह कहानी है बदक़िस्मत रग्घू की, उसकी सौतेली माँ की। यह कहानी है रग्घू की पत्नी मुलिया की, उसके हठ की। यह कहानी है सौतेले भाइयों की। यह कहानी है एक नेक इंसान के बदक़िस्मती की। यह कहानी है घर के बँटवारे की, अलग्योझे की।
    अचानक परिवार में आए उतार-चढ़ाव ने रग्घू की ज़िंदगी में भयंकर तूफ़ान खड़ा कर दिया। पर इस अलग्योझा के कारण जिंदगियों ने कुछ ऐसे करवट बदली कि...
    जानने के लिए सुनिए मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी - अलग्योझा
    Munshi Premchand's f
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    50 mins
  • सुजान भगत - प्रेमचंद | Sujaan Bhagat - Premchand.
    Dec 31 2021
    यह कहानी है सुजान नामक एक किसान की, सुजान की खेती में कई साल से कंचन बरस रहा था। धन हाथ आते ही सुजान धर्म, सेवा और दान-पुण्य की ओर मुड़े। वह सुजान से सुजान भगत हो गए। पर बाद में उसकी पत्नी और बेटों को यह बात खटकने लगी। घर में उसके अधिकार छिने जाने लगे। सुजान को बहुत बुरा लगा। स्वाभिमानी सुजान ने कुछ ऐसा किया जिससे सारे हालात ही बदल गए। सुजान ने ऐसा क्या किया..? जानने के लिए सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद जी की प्रसिद्ध कहानी - सुजान भगत
    Munshi Premchand's
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    31 mins
  • बोध - प्रेमचंद | Bodh - Premchand.
    Nov 29 2021
    पंडित चंद्रधर, जो अध्यापक थे, वे सदा पछताया करते थे कि यदि वे किसी अन्य विभाग में नौकर होते तो अब तक हाथ में चार पैसे होते। उनके दो पड़ोसी, एक दारोगा थे और एक तहसील में सियाहे नवीस थे, जिनका वेतन पंडित जी के वेतन से कुछ अधिक न था, फिर भी उनकी चैन से गुज़रती थी। नौकर-चाकर थे, ठाठ-बाट था। पर कुछ ऐसा होता है जिससे उन्हें अंत में ज्ञात होता है कि अध्यापक का पद कितना महान है, शिक्षक समाज में कितना गौरवशाली है।
    ... ऐसा क्या होता है ?
    जानने के लिए सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी - बोध.
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    19 mins