• एपिसोड 1: शून्य की ओर पलायन | Arjun Bharti Mina
    Dec 22 2025
    एपिसोड 1: शून्य की ओर पलायनआसमान का रंग अब नीला नहीं, बल्कि तांबे जैसा सुर्ख लाल था। श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर खड़ा विशालकाय 'नाविक-1' किसी जहाज जैसा नहीं, बल्कि लोहे के एक ऊंचे पर्वत जैसा दिख रहा था। चारों तरफ साइरनों की गूँज थी और हवा में जलती हुई ओजोन की कड़वाहट घुली थी।कंट्रोल रूम के अंदर, अर्जुन अपनी पायलट सीट पर शांत बैठा था। उसने अपनी जेब से एक छोटा सा कलश निकाला, जिसमें उसके गाँव की मिट्टी थी। उसने उसे कसकर भींचा और फिर डैशबोर्ड के पास रख दिया। तभी उसके कानों में एक तीखी, कड़क आवाज़ गूँजी।"कैप्टन अर्जुन, अगर मिट्टी से मोह खत्म हो गया हो, तो क्या हम मानवता को बचाने के काम पर वापस लौटें?"अर्जुन ने सिर घुमाया। बगल की सीट पर कायरा एलिन बैठी थी। उसकी आँखों में कोई डर नहीं था, सिर्फ ठंडी गणना थी। कायरा ने अपने दस्ताने कसे और सामने तैर रही होलोग्राफिक स्क्रीन पर डेटा की बौछार कर दी।"तैयार हूँ, कायरा," अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा। "लेकिन याद रखना, अगर आज हम सफल हुए, तो हम फिर कभी इस ज़मीन को नहीं देख पाएंगे।""यही तो योजना है, अर्जुन। पीछे जो बचा है वो सिर्फ राख है। आगे जो है, वो भविष्य है।" कायरा के स्वर में कोई हिचकिचाहट नहीं थी।अचानक, जहाज की AI प्रणाली, सारा, की डिजिटल आवाज़ केबिन में गूँजी, "प्रोजेक्ट 'द लास्ट एक्सोडस' शुरू किया जा रहा है। न्यूरल-लिंक सक्रिय है। कैप्टन अर्जुन, सिंक शुरू करें।"जैसे ही अर्जुन ने न्यूरल-कैप पहना, हज़ारों महीन सुइयां उसकी खोपड़ी से जुड़ गईं। एक भयंकर बिजली का झटका उसके पूरे शरीर से होकर गुज़रा। उसकी चीख केबिन की दीवारों से टकराकर रह गई। उसका दिमाग अब 'नाविक-1' के मुख्य कंप्यूटर से जुड़ चुका था। उसे महसूस हो रहा था कि जहाज के हाइड्रोलिक पाइप्स उसकी नसें बन गए हैं और इंजन की धड़कन उसके दिल की धड़कन।"इंजन... जाग्रत हो गया है," अर्जुन की आवाज़ अब बदल चुकी थी, उसमें एक मशीनी गूँज थी।"काउंटडाउन शुरू! 10... 9... 8..." सारा की आवाज़ गूँज रही थी।जैसे ही गिनती शून्य पर पहुँची, नाविक-1 के आधार से नीली प्लाज्मा अग्नि की ऐसी लपटें उठीं कि पूरा द्वीप काँप उठा। हज़ारों टन लोहा आसमान की ओर बढ़ा। गुरुत्वाकर्षण का दबाव इतना था कि अर्जुन और कायरा अपनी सीटों में धँस गए। देखते ही देखते, आसमान का लाल रंग काला पड़ गया। वे वायुमंडल को चीरकर...
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    4 mins
  • एपिसोड 2: अंधेरे का साया | Arjun Bharti Mina
    Dec 22 2025
    एपिसोड 2: अंधेरे का साया'नाविक-1' के मुख्य केबिन में सन्नाटा इतना गहरा था कि अर्जुन को अपनी ही धड़कनें साफ़ सुनाई दे रही थीं। कार्गो होल्ड-4 से आने वाली वह अजीब सी खुरचने की आवाज़ अब बंद हो चुकी थी, लेकिन सेंसर पर जलती वह लाल लाइट चीख-चीखकर खतरे का इशारा कर रही थी।"कायरा, तुम यहीं रुको और 'सारा' के ज़रिए हर एक गलियारे पर नज़र रखो," अर्जुन ने अपनी पल्स-गन को लोड करते हुए कहा। उसकी आवाज़ में वह स्थिरता थी जो केवल एक अनुभवी सैनिक में होती है।"सावधान रहना, अर्जुन," कायरा की उंगलियां तेज़ी से कीबोर्ड पर नाच रही थीं। "सेक्टर-4 की ऑक्सीजन सप्लाई में कुछ गड़बड़ है। वहां का तापमान सामान्य से काफी कम हो चुका है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई चीज़ वहां की सारी ऊर्जा सोख रही है।"अर्जुन ने सिर हिलाया और भारी ऑटोमैटिक दरवाज़े को पार कर अंधेरे गलियारे में कदम रखा। नाविक-1 की नीली इमरजेंसी लाइट्स रह-रहकर झपका रही थीं, जिससे दीवारों पर लंबी और डरावनी परछाइयां बन रही थीं। जैसे-जैसे वह कार्गो होल्ड की ओर बढ़ रहा था, उसे महसूस हुआ कि हवा में एक अजीब सी धातु जैसी गंध है—जैसे बिजली के तारों के जलने की बू।"कायरा, क्या तुम मुझे सुन सकती हो?" अर्जुन ने अपने कम्युनिकेटर पर फुसफुसाते हुए कहा।"हाँ अर्जुन, मैं तुम्हें ट्रैक कर रही हूँ। तुम चेंबर 101 के बिल्कुल करीब हो। लेकिन... अर्जुन, रुक जाओ!" कायरा की आवाज़ में अचानक दहशत भर गई।"क्या हुआ?""सेंसर पर... तुम्हारी परछाई के ठीक पीछे एक और सिग्नल दिख रहा है। वह बहुत छोटा है, लेकिन उसकी ऊर्जा का स्तर किसी परमाणु रिएक्टर जितना है!"अर्जुन झटके से मुड़ा, अपनी गन तानकर। लेकिन वहां कुछ नहीं था—सिर्फ खाली गलियारा और ठंडी हवा। तभी, चेंबर 101 के अंदर से एक मद्धम सी आवाज़ आई। यह किसी के रोने जैसी थी।अर्जुन ने धीरे से चेंबर का दरवाज़ा ढकेला। अंदर का नज़ारा देखकर उसके पैर जम गए। ईथर क्रिस्टल, जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत था, अपनी जगह से गायब था। उसकी जगह फर्श पर एक छोटा सा बच्चा बैठा था, जिसकी उम्र मुश्किल से सात-आठ साल रही होगी। उसकी आँखें पूरी तरह सफेद थीं और उसके शरीर से वही नीली रोशनी निकल रही थी जो ईथर क्रिस्टल की पहचान थी।"एक बच्चा? यहाँ?" अर्जुन ने गन नीचे की, उसकी आँखों में हैरानी थी।"अर्जुन, उसे छुओ मत!" कायरा की आवाज़ कान के पास ...
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