Bhagwant Anmol
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भगवंत अनमोल हिंदी के उन चुनिंदा युवा उपन्यासकारों में से हैं जो अपने नए और अनोखे विषयों के लिए जाने जाते हैं। उनके उपन्यास जहाँ आम पाठकों के बीच लोकप्रिय रहे हैं, वहीं साहित्यिक जगत में सराहे गए और अकादमिक जगत द्वारा अपनाए भी गए हैं। उनका उपन्यास ‘ज़िन्दगी 50-50’ एक ओर दैनिक जागरण की बेस्टसेलर सूची में कई बार शामिल हुआ, वहीं दूसरी ओर इसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा कर्नाटक विश्वविद्यालय के परास्नातक पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया। उनका उपन्यास ‘प्रमेय’ साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार से सम्मानित हो चुका है। इनके अतिरिक्त ‘बाली उमर’ और ‘गेरबाज़’ उनके अन्य चर्चित उपन्यास हैं। विशेष रूप से ‘गेरबाज़’ हिंदी का हकलाहट की समस्या पर आधारित एकमात्र उपन्यास है। लेखक वर्तमान में कानपुर में रहते हुए 'इंडियन स्पीच थेरेपी एंड रिहैब सेंटर' का संचालन कर रहे हैं। प्रकाशित कृतियाँ 1. ज़िन्दगी 50-50 — राजपाल एंड संज (2017) 2. बाली उमर — राजपाल एंड संज (2019) 3. प्रमेय — राजपाल एंड संज (2021) 4. गेरबाज़ — पेंगुइन रैंडम हाउस (2023) 5. बावनी इमली — राजपाल एंड संज (2026) पुरस्कार 1. साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार (2022) 2. उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार (2017) उपलब्धियाँ 1. ‘ज़िन्दगी 50-50’ को कर्नाटक विश्वविद्यालय के परास्नातक पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। 2. ‘ज़िन्दगी 50-50’ का फ्रेंच भाषा में अनुवाद हेतु फ्रेंच बुक हाउस द्वारा चयन किया गया। 3. लेखक की कृतियों पर देश भर के सैकड़ों शोधार्थी शोधरत हैं।
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