Apne Samne (Hindi Edition)
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Narrated by:
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Virtual Voice
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Written by:
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Kunvar Narayan
This title uses virtual voice narration
जीवन को अनुभूति और चिन्तन के विभिन्न धरातलों पर ग्रहण करनेवाले कवि कुँवर नारायण अपनी कविताओं में सीमाएँ नहीं बनाते; उनकी ज़्यादातर कविताएँ किसी एक ही तरह की भाषा या विषय में विसर्जित-सी हो गई नहीं लगतीं—दोनों को विस्तृत करती लगती हैं। अनेक कविताएँ मानो समाप्त नहीं होतीं, एक ख़ास तरह की हमारी बेचैनियों का हिस्सा बन जाती हैं। इस तरह से देखें तो वे अपने को सिद्ध करनेवाले कवि हमें नहीं नज़र आते। वे बराबर अपनी कविताओं में मुहावरों से बचते हैं और अपने ढंग से उनसे लड़ते भी हैं। उनकी कविता की भाषा में धोखे नहीं हैं। अधिकांश कविताओं का पैनापन ज़िन्दगी के कई हिस्सों को बिलकुल नये ढंग से छूता है।
वे मानते हैं कि दैनिक यथार्थ के साथ कविता का रिश्ता नज़दीक का भी हो सकता है और दूर का भी और दोनों ही तरह वह जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हो सकता है—सवाल है, कविता कितने सच्चे और उदार अर्थों में हमें आदमी बनाने की ताक़त रखती है। कविता उनके लिए जीवन का प्रतिबिम्ब मात्र नहीं, जीवन का सबसे आत्मीय प्रसंग है—कविता, जो अपने चारों तरफ़ भी देखती है और अपने को सामने रखकर भी। उनकी कविताओं में हमें बहुत सतर्क क़िस्म की भाषा का इस्तेमाल मिलता है; वह कभी बहुत गहराई से किसी ऐतिहासिक या दार्शनिक अनुभव की तहों में चली जाती है और कभी इतनी सरल दिखती है कि वह हमें अपने बहुत क़रीब नज़र आती है। बहुआयामी स्तरों पर भाषा से यह लड़ाई और प्यार कुँवर नारायण को चुनौती देता है, ख़ास तौर पर एक ऐसे वक़्त में जब कविता का एक बड़ा हिस्सा एक ही तरह की भाषा में अपने को अभिव्यक्त किए चला जा रहा है।
हिन्दी के अग्रणी आधुनिक कवि कुँवर नारायण की कविता की दुनिया में जाने का मतलब ज़िन्दगी को गहराई और विस्तार से देखने और जानने का अच्छा मौक़ा पा लेना है।