शिव विवाह: द्वार पर भूत-गण
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धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 76
बारात आ रही है। महल की छत पर एक माँ खड़ी है, सड़क की ओर देखती हुई। बेटी का दूल्हा आने वाला है। और हर बार, जब कोई तेजस्वी, मुकुटधारी, जगमगाता हुआ रूप सामने से निकलता है, वह पास खड़े नारद मुनि से पूछती है, यही हैं न? और हर बार नारद कहते हैं, नहीं, माता। यह तो उनके सेवक हैं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। छिहत्तरवाँ एपिसोड, तीसरा दिन। तिहत्तरवें एपिसोड में महादेव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया, और पार्वती लज्जित होकर घर लौटीं। इकहत्तरवें में वे पर्वत पर चढ़ीं, और तप से शिव को पाया। आज, वह दिन, जिसकी ओर सब कुछ बढ़ रहा था। शिव विवाह। कथा शिव पुराण से, रुद्र संहिता के पार्वती खंड से, जो इस विवाह को बड़े प्रेम से, बड़े विस्तार से, और बहुत हँसी-विनोद के साथ सुनाता है।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 73।
स्रोत। श्रेणी: पुराण, कथा-रूप में। कथा शिव पुराण, रुद्र संहिता, पार्वती खंड के तैंतालीसवें से पैंतालीसवें, और इक्यावनवें अध्याय से है, विज़डमलिब डॉट ओआरजी पर अंग्रेज़ी अनुवाद से: छत पर नारद के साथ मैना, और एक-एक कर गुज़रते देवता; गणों और शिव का वर्णन; मैना का मूर्छित होना, उनके उलाहने, सोना और काँच वाली बात, और उनकी धमकियाँ; समझाने के प्रयास और पार्वती का उत्तर; नारद की प्रार्थना और शिव का सुंदर रूप; मैना की क्षमा-याचना; नगर की स्त्रियाँ; और रति का कामदेव की भस्म लाना और काम का लौटना। संवाद संक्षेप में और भाव में हैं। कालिदास के कुमारसंभव का सातवाँ सर्ग, और दूसरी कथाएँ, विवाह को अलग ढंग से कहती हैं। शिव के परिवार और मैना पर विचार मेरा मनन है।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।