शुंभ-निशुंभ का स्वर्ग पर अधिकार
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धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 75
शरीरकोशाद्यत्तस्याः पार्वत्या निःसृताम्बिका। कौशिकीति समस्तेषु ततो लोकेषु गीयते॥ पार्वती के शरीर-कोश से अंबिका निकलीं, इसीलिए सारे लोकों में वे कौशिकी नाम से गाई जाती हैं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। पचहत्तरवाँ एपिसोड, तीसरा दिन। पहले सीज़न के छप्पनवें एपिसोड में माँ ने महिषासुर का वध किया था, और युद्ध के अंत में देवताओं को एक वचन दिया था। जब भी संकट में मुझे याद करोगे, मैं आऊँगी। आज देवता देखेंगे, कि वह वचन सच्चा था या नहीं। आज तीसरा दिन है, माँ चंद्रघंटा का, जिनसे आज बाद में मिलेंगे। और आज से सप्तशती का तीसरा, सबसे लंबा, सबसे बड़ा चरित्र शुरू होता है। उत्तम चरित्र। माँ महासरस्वती। और दो असुर भाई। शुंभ और निशुंभ।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 56।
स्रोत। श्रेणी: पुराण, श्लोकों सहित। शुंभ-निशुंभ का अधिकार और छीने गए पदों की सूची, देवताओं का माँ के वचन को याद करना, हिमालय पर स्तुति, पार्वती का गंगा स्नान, अंबिका का कौशिकी रूप में निकलना और पार्वती का कालिका होना, चंड-मुंड की सूचना और शुंभ के रत्नों की सूची, और सुग्रीव को भेजना, यह सब सप्तशती के पाँचवें अध्याय से है, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर पाठ और अनुवाद से, जहाँ स्तुति नौवें से इक्यासीवें श्लोक तक है। उद्धृत श्लोक पाँचवें अध्याय के नौवें, दसवें का उत्तरार्ध, सत्तासीवें और अट्ठासीवें हैं, वहीं पढ़े गए। कौशिकी के प्रकट होने की दूसरी कथाएँ बाद के पुराणों की हैं, केवल संक्षेप में दी गईं। देवताओं को पद मानने वाली बात, और स्तुति को बेघरों का गीत कहना, मेरा मनन है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।