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Written by: Rajvardhan Singh Naruka
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Welcome to "Vigyan Bhairav Tantra: 112 Techniques for Meditation and Self-Realization" with Rajvardhan. In this podcast, we delve into the ancient and profound teachings of the Vigyan Bhairav Tantra, a sacred dialogue between Lord Shiva and Goddess Parvati. This text offers 112 unique methods to achieve inner peace, self-awareness, and spiritual enlightenment. Whether you are a seasoned practitioner or new to meditation, these timeless techniques can transform your daily life and deepen your spiritual journey. Join us as we explore these powerful practices and unlock the secrets to a more mindRajvardhan Singh Naruka Self-Help Success
Episodes
  • Vigyan bhairav tantra self realisation or vidhi sutra 3 voice cover by mr.krvsn
    Jun 21 2024
    भैरव तंत्र विधि सूत्र 3 में विवेक का महत्व बताया गया है। यह सूत्र कहता है कि साधक को विवेकशील होना चाहिए, जिससे वह सही और गलत में अंतर कर सके। साधना के दौरान आत्म-नियंत्रण और संयम आवश्यक है। साधक को अपने मन, वचन और कर्म पर नियंत्रण रखना चाहिए और अध्यात्मिक मार्ग पर धैर्य और निष्ठा से चलना चाहिए। विवेक से ही साधक भैरव तंत्र की गूढ़ता को समझ सकता है और सिद्धि प्राप्त कर सकता है। विवेक ही साधक को आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है।
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    18 mins
  • Vigyan bhairav tantra self realisation or vidhi sutra 2 voice cover by mr.krvsn
    Jun 10 2024
    विज्ञान भैरव तंत्र का दूसरा सूत्र श्वास के दो पलों के बीच की अवस्था पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश देता है। जब श्वास भीतर जाकर रुके या बाहर जाकर रुके, उस क्षण पर ध्यान लगाने से आंतरिक शांति और गहन ध्यान की अवस्था प्राप्त होती है। यह विधि साधक को वर्तमान क्षण में स्थिर रहने और मन की चंचलता को नियंत्रित करने में सहायता करती है।
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    12 mins
  • Vigyan bhairav tantra self realisation or vidhi sutra 1 voice cover by mr.krvsn
    Jun 5 2024
    विज्ञान भैरव तंत्र का पहला सूत्र श्वास के प्रति जागरूकता पर केंद्रित है। इसमें कहा गया है कि जब श्वास अंदर जाए और बाहर आए, उस समय पर ध्यान केंद्रित करें। श्वास की गति और अंतराल को महसूस करें। श्वास की शुरुआत, मध्य और अंत को जागरूकता के साथ अनुभव करें। इस प्रक्रिया से व्यक्ति वर्तमान क्षण में रहना सीखता है और मन को शांत करता है। यह ध्यान विधि आंतरिक शांति और आत्मबोध को प्रकट करने का एक साधन है। श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से मन की चंचलता कम होती है और स्थिरता आती है। Voice cover by Rajvardhan singh naruka ( Mr.krvsn) विज्ञान भैरव तंत्र में 112 ध्यान विधियों के नाम निम्नलिखित हैं: 1. प्राण ध्यान 2. विभक्ति प्राण 3. केन्द्र प्राण 4. अंग कुंडलिनी 5. आकाश प्राण 6. शब्दानुसन्धान 7. नादानुसन्धान 8. स्वर साधना 9. स्वर निष्ठ 10. प्राण समाधि 11. हृदय समाधि 12. जप समाधि 13. भक्ति समाधि 14. भाव समाधि 15. ध्यान समाधि 16. मनन समाधि 17. श्वास समाधि 18. वायु समाधि 19. ज्योति समाधि 20. तेजो ध्यान 21. तेजो समाधि 22. रूप ध्यान 23. रूप समाधि 24. शब्द ध्यान 25. शब्द समाधि 26. रस ध्यान 27. रस समाधि 28. गन्ध ध्यान 29. गन्ध समाधि 30. सूर्य ध्यान 31. चन्द्र ध्यान 32. नक्षत्र ध्यान 33. ध्रुव ध्यान 34. तारा ध्यान 35. दिशा ध्यान 36. विदिशा ध्यान 37. स्वर समाधि 38. स्वर निष्ठ 39. स्वर ध्यान 40. स्वर समाधि 41. वायु ध्यान 42. अग्नि ध्यान 43. जल ध्यान 44. पृथ्वी ध्यान 45. ज्योति ध्यान 46. रात्रि ध्यान 47. दिवस ध्यान 48. काल ध्यान 49. महाकाल ध्यान 50. नाद ध्यान 51. बीज ध्यान 52. तत्त्व ध्यान 53. तत्त्व समाधि 54. गुण ध्यान 55. गुण समाधि 56. योग ध्यान 57. योग समाधि 58. ध्यान समाधि 59. चित्त ध्यान 60. चित्त समाधि 61. हृदय ध्यान 62. हृदय समाधि 63. वृत्ति ध्यान 64. वृत्ति समाधि 65. भाव ध्यान 66. भाव समाधि 67. जप ध्यान 68. जप समाधि 69. भक्ति ध्यान 70. भक्ति समाधि 71. कर्म ध्यान 72. कर्म समाधि 73. ज्ञान ध्यान 74. ज्ञान समाधि 75. मन्त्र ध्यान 76. मन्त्र समाधि 77. स्वर ध्यान 78. स्वर समाधि 79. दृष्टि ध्यान 80. दृष्टि समाधि 81. श्रोत्र ध्यान 82. श्रोत्र समाधि 83. स्पर्श ध्यान 84. स्पर्श समाधि 85. रूप ध्यान 86. रूप समाधि 87. रस ध्यान 88. रस समाधि 89. गन्ध ध्यान 90. गन्ध समाधि 91. स्नान ध्यान 92. स्नान समाधि 93. आसन ध्यान 94. आसन समाधि 95. प्राणायाम ध्यान 96. प्राणायाम समाधि 97. प्रत्याहार ध्यान 98. प्रत्याहार समाधि 99. धारणा ध्यान 100. धारणा समाधि 101. ध्यान ध्यान 102. ध्यान समाधि ...
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    15 mins
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