Episodes

  • Vigyan bhairav tantra self realisation or vidhi sutra 3 voice cover by mr.krvsn
    Jun 21 2024
    भैरव तंत्र विधि सूत्र 3 में विवेक का महत्व बताया गया है। यह सूत्र कहता है कि साधक को विवेकशील होना चाहिए, जिससे वह सही और गलत में अंतर कर सके। साधना के दौरान आत्म-नियंत्रण और संयम आवश्यक है। साधक को अपने मन, वचन और कर्म पर नियंत्रण रखना चाहिए और अध्यात्मिक मार्ग पर धैर्य और निष्ठा से चलना चाहिए। विवेक से ही साधक भैरव तंत्र की गूढ़ता को समझ सकता है और सिद्धि प्राप्त कर सकता है। विवेक ही साधक को आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है।
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    18 mins
  • Vigyan bhairav tantra self realisation or vidhi sutra 2 voice cover by mr.krvsn
    Jun 10 2024
    विज्ञान भैरव तंत्र का दूसरा सूत्र श्वास के दो पलों के बीच की अवस्था पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश देता है। जब श्वास भीतर जाकर रुके या बाहर जाकर रुके, उस क्षण पर ध्यान लगाने से आंतरिक शांति और गहन ध्यान की अवस्था प्राप्त होती है। यह विधि साधक को वर्तमान क्षण में स्थिर रहने और मन की चंचलता को नियंत्रित करने में सहायता करती है।
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    12 mins
  • Vigyan bhairav tantra self realisation or vidhi sutra 1 voice cover by mr.krvsn
    Jun 5 2024
    विज्ञान भैरव तंत्र का पहला सूत्र श्वास के प्रति जागरूकता पर केंद्रित है। इसमें कहा गया है कि जब श्वास अंदर जाए और बाहर आए, उस समय पर ध्यान केंद्रित करें। श्वास की गति और अंतराल को महसूस करें। श्वास की शुरुआत, मध्य और अंत को जागरूकता के साथ अनुभव करें। इस प्रक्रिया से व्यक्ति वर्तमान क्षण में रहना सीखता है और मन को शांत करता है। यह ध्यान विधि आंतरिक शांति और आत्मबोध को प्रकट करने का एक साधन है। श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से मन की चंचलता कम होती है और स्थिरता आती है। Voice cover by Rajvardhan singh naruka ( Mr.krvsn) विज्ञान भैरव तंत्र में 112 ध्यान विधियों के नाम निम्नलिखित हैं: 1. प्राण ध्यान 2. विभक्ति प्राण 3. केन्द्र प्राण 4. अंग कुंडलिनी 5. आकाश प्राण 6. शब्दानुसन्धान 7. नादानुसन्धान 8. स्वर साधना 9. स्वर निष्ठ 10. प्राण समाधि 11. हृदय समाधि 12. जप समाधि 13. भक्ति समाधि 14. भाव समाधि 15. ध्यान समाधि 16. मनन समाधि 17. श्वास समाधि 18. वायु समाधि 19. ज्योति समाधि 20. तेजो ध्यान 21. तेजो समाधि 22. रूप ध्यान 23. रूप समाधि 24. शब्द ध्यान 25. शब्द समाधि 26. रस ध्यान 27. रस समाधि 28. गन्ध ध्यान 29. गन्ध समाधि 30. सूर्य ध्यान 31. चन्द्र ध्यान 32. नक्षत्र ध्यान 33. ध्रुव ध्यान 34. तारा ध्यान 35. दिशा ध्यान 36. विदिशा ध्यान 37. स्वर समाधि 38. स्वर निष्ठ 39. स्वर ध्यान 40. स्वर समाधि 41. वायु ध्यान 42. अग्नि ध्यान 43. जल ध्यान 44. पृथ्वी ध्यान 45. ज्योति ध्यान 46. रात्रि ध्यान 47. दिवस ध्यान 48. काल ध्यान 49. महाकाल ध्यान 50. नाद ध्यान 51. बीज ध्यान 52. तत्त्व ध्यान 53. तत्त्व समाधि 54. गुण ध्यान 55. गुण समाधि 56. योग ध्यान 57. योग समाधि 58. ध्यान समाधि 59. चित्त ध्यान 60. चित्त समाधि 61. हृदय ध्यान 62. हृदय समाधि 63. वृत्ति ध्यान 64. वृत्ति समाधि 65. भाव ध्यान 66. भाव समाधि 67. जप ध्यान 68. जप समाधि 69. भक्ति ध्यान 70. भक्ति समाधि 71. कर्म ध्यान 72. कर्म समाधि 73. ज्ञान ध्यान 74. ज्ञान समाधि 75. मन्त्र ध्यान 76. मन्त्र समाधि 77. स्वर ध्यान 78. स्वर समाधि 79. दृष्टि ध्यान 80. दृष्टि समाधि 81. श्रोत्र ध्यान 82. श्रोत्र समाधि 83. स्पर्श ध्यान 84. स्पर्श समाधि 85. रूप ध्यान 86. रूप समाधि 87. रस ध्यान 88. रस समाधि 89. गन्ध ध्यान 90. गन्ध समाधि 91. स्नान ध्यान 92. स्नान समाधि 93. आसन ध्यान 94. आसन समाधि 95. प्राणायाम ध्यान 96. प्राणायाम समाधि 97. प्रत्याहार ध्यान 98. प्रत्याहार समाधि 99. धारणा ध्यान 100. धारणा समाधि 101. ध्यान ध्यान 102. ध्यान समाधि ...
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    15 mins
  • Vigyan Bhairav Tantra: 112 Techniques for Meditation and Self-Realization. By mr.krvsn
    Jun 4 2024
    Mr.krvsn( Rajvardhan singh naruka) विज्ञान भैरव तंत्र एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है जो शिव और शक्ति के संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से ध्यान, तंत्र और योग की 112 तकनीकों को समझाता है। शिव अपने साथी देवी पार्वती को विभिन्न ध्यान विधियों के माध्यम से परम सत्य और आत्म-साक्षात्कार की राह दिखाते हैं। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ध्यान और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण साधन है। विज्ञान भैरव तंत्र में वर्णित ध्यान की विधियाँ आज भी ध्यान साधना में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती हैं। विज्ञान भैरव तंत्र एक प्रतिष्ठित तांत्रिक ग्रंथ है जिसमें भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच संवाद को प्रस्तुत किया गया है। इस ग्रंथ में 112 ध्यान तकनीकों का वर्णन है, जो साधकों को आत्म-साक्षात्कार और परम शांति प्राप्त करने में सहायक होती हैं। यह ग्रंथ तंत्र, योग और ध्यान के गहन सिद्धांतों को सरल और सुस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करता है।विज्ञान भैरव तंत्र के अनुसार, ध्यान की इन विधियों का पालन करने से साधक अपने भीतर छिपे दिव्य सत्य को जान सकता है। इनमें से कुछ विधियाँ सांस की गति, ध्वनि, स्पर्श, दृष्टि, ध्यान और मन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित हैं। यह ग्रंथ बताता है कि किसी भी साधारण गतिविधि के माध्यम से भी ध्यान किया जा सकता है, जैसे चलते समय, खाते समय, या किसी प्राकृतिक दृश्य को देखते समय।इस ग्रंथ का उद्देश्य यह है कि व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में किसी भी स्थिति में ध्यान की अवस्था को प्राप्त कर सके और अपनी आंतरिक चेतना के साथ एक गहरे संबंध को महसूस कर सके। विज्ञान भैरव तंत्र यह भी सिखाता है कि ध्यान केवल मानसिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक अनुभव है जो मन, शरीर और आत्मा को एकीकृत करता है। इस प्रकार, विज्ञान भैरव तंत्र न केवल आध्यात्मिक विकास के लिए, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। Book name bhairav tantra by osho Voice cover - Mr.krvsn( Rajvardhan singh naruka)
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    15 mins
  • New podcast episode soon 🥰
    Jun 3 2024
    iss podcast me aane wale new episode tantra, knowledge or bhi naye naye topics par baat hogi.
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    1 min