Mr.krvsn( Rajvardhan singh naruka) विज्ञान भैरव तंत्र एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है जो शिव और शक्ति के संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से ध्यान, तंत्र और योग की 112 तकनीकों को समझाता है। शिव अपने साथी देवी पार्वती को विभिन्न ध्यान विधियों के माध्यम से परम सत्य और आत्म-साक्षात्कार की राह दिखाते हैं। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ध्यान और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण साधन है। विज्ञान भैरव तंत्र में वर्णित ध्यान की विधियाँ आज भी ध्यान साधना में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती हैं। विज्ञान भैरव तंत्र एक प्रतिष्ठित तांत्रिक ग्रंथ है जिसमें भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच संवाद को प्रस्तुत किया गया है। इस ग्रंथ में 112 ध्यान तकनीकों का वर्णन है, जो साधकों को आत्म-साक्षात्कार और परम शांति प्राप्त करने में सहायक होती हैं। यह ग्रंथ तंत्र, योग और ध्यान के गहन सिद्धांतों को सरल और सुस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करता है।विज्ञान भैरव तंत्र के अनुसार, ध्यान की इन विधियों का पालन करने से साधक अपने भीतर छिपे दिव्य सत्य को जान सकता है। इनमें से कुछ विधियाँ सांस की गति, ध्वनि, स्पर्श, दृष्टि, ध्यान और मन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित हैं। यह ग्रंथ बताता है कि किसी भी साधारण गतिविधि के माध्यम से भी ध्यान किया जा सकता है, जैसे चलते समय, खाते समय, या किसी प्राकृतिक दृश्य को देखते समय।इस ग्रंथ का उद्देश्य यह है कि व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में किसी भी स्थिति में ध्यान की अवस्था को प्राप्त कर सके और अपनी आंतरिक चेतना के साथ एक गहरे संबंध को महसूस कर सके। विज्ञान भैरव तंत्र यह भी सिखाता है कि ध्यान केवल मानसिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक अनुभव है जो मन, शरीर और आत्मा को एकीकृत करता है। इस प्रकार, विज्ञान भैरव तंत्र न केवल आध्यात्मिक विकास के लिए, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। Book name bhairav tantra by osho Voice cover - Mr.krvsn( Rajvardhan singh naruka)
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