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Padhaku Nitin

Padhaku Nitin

Written by: Aaj Tak Radio
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About this listen

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.

कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?

भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.Copyright © 2026 Living Media India Limited
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  • Dhurandhar, Kashmir Files और Kerala Story जैसी फिल्में नहीं बननी चाहिए? : पढ़ाकू नितिन
    Feb 12 2026
    सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, किसी समाज को, उसकी जड़ों और उसके culture को समझने का एक रास्ता भी है. सिनेमा के अंदर वह ताकत है कि आप 2026 में किसी थिएटर में बैठकर The Godfather देखें, तो मुमकिन है आपको लगे कि World War II अभी-अभी खत्म हुआ है. उसी थिएटर में बैठकर Interstellar देखें, तो महसूस हो कि दुनिया खत्म होने के कगार पर है. और अगर ओए लक्की! लक्की ओए! देखें, तो समझ आए कि दिल्लीवालों की complexities क्या हैं. Cinema एक subjective माध्यम भी है. दो अलग-अलग लोग एक ही फिल्म को अलग नजरिए से देख सकते हैं और इस पर बहस कर सकते हैं कि क्या वह फिल्म किसी propaganda का हिस्सा है या सच्चाई दिखाती है. आपने धुरंधर, छावा और The Kashmir Files को लेकर हुए बवाल भी देखे होंगे. क्योंकि आजकल फिल्मों पर propaganda cinema होने के आरोप पहले से ज़्यादा लगने लगे हैं.

    Padhaku Nitin के इस एपिसोड में फिल्म journalist Mihir Pandya और documentary filmmaker Eshan Sharma के साथ इसी मुद्दे को टटोलेंगे. ये सिनेमा को पढ़ते भी हैं और पढ़ाते भी हैं, एक अलग नजरिए के साथ. इन्होंने हाल ही में propaganda cinema पर एक workshop भी की है. इसलिए आज हम इन्हीं से समझेंगे कि propaganda cinema आखिर होता क्या है. क्या propaganda-less cinema जैसी कोई चीज होती भी है. क्या सिनेमा सिर्फ एक छलावा है. क्या cinema की अपनी politics होती है, और क्या politics के बिना cinema संभव है.
    अंत तक बने रहिएगा. चैनल Subscribe करना भी न भूलिएगा.

    प्रड्यूसर: मानव देव रावत
    साउंड मिक्स: अमन पाल
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    1 hr and 39 mins
  • भारत क्यों नहीं बन पा रहा विश्वगुरु? Economist ने किया पर्दाफाश : पढ़ाकू नितिन
    Feb 2 2026
    फरवरी 2026 आ चुका है. साथ ही आ चुका है इस साल का बजट भी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल लोकसभा में Union Budget 2026 पेश किया. 83 मिनट का भाषण दिया. कई ऐलान किए. और अब हर साल की तरह बजट पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. सरकार बजट के फायदे गिना रही है. विपक्ष नुकसान. प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इस साल बजट हमारे युवाओं के सपनों का बिंब है और नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि युवा और किसान परेशान है और बजट ज़रूरी मुद्दों को एड्रेस नहीं कर रहा. Experts समझाने में जुटे हैं कि भारी Economic Terms में लबरेज़ बजट. आपके हमारे लिए क्या समेटे हुए है? तो चलिए हम भी एक ऐसे ही Expert की शरण लेते हैं जो हमको समझाएं कि क्या वाकई इस साल का बजट थोड़ा बोरिंग है, जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं हैं. या फिर कुछ ऐसे Undertones समेटे हुए है जो फिलहाल हमें समझ नहीं आ रहे लेकिन समझना ज़रूरी है. हमारे साथ है हमारे पुराने मेहमान Economist Arun Kumar जी. Yale, Columbia University जैसी Universities में Lectures दे चुके हैं. दुनियाभर में बुलाए जाते हैं. JNU में 30 साल इकॉनमिक्स पढ़ा चुके हैं. खासियत ये है इनकी कि आसान भाषा में सब समझाकर चौंका देते हैं. गुरुवार आने वाला पढ़ाकू नितिन का एपिसोड इस बार आपके लिए सोमवार ही ले आए हैं. पूरा देखिएगा और प्यार दीजिएगा.

    प्रड्यूसर: मानव देव रावत
    साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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    1 hr and 24 mins
  • Neeraj Chopra, Bajrang Punia, Rahgir जहां पढ़े उस LPU का ये सच नहीं जानते होंगे आप? : पढ़ाकू नितिन
    Jan 29 2026
    पढ़ाकू नितिन में ऐसा कम होता है जब हम स्टूडियो से बाहर निकलते हों. लेकिन इस बार हम सिर्फ़ स्टूडियो से ही नहीं शहर, यहां तक की राज्य से भी बाहर आ गए हैं. पढ़ाकू नितिन की टीम पहुंच गई है पंजाब के जालंधर. इस एपिसोड में हम घूमे जालंधर की मशहूर Lovely Professional University में. 150 से ज़्यादा कोर्सेज़, 35 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स—Agriculture, Robotics, Management, Technology, Liberal Arts, Law और न जाने कितने ऐसे कोर्सेज़। दिमाग में सवाल आया कि आख़िर इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी चलती कैसे है? स्कूली शिक्षा की खामियों की बात तो हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी लेवल पर ये मामला कैसा है? यूनिवर्सिटीज़ करोड़ों के प्लेसमेंट्स कैसे करवाती हैं? एक वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी कैसी होती है? क्या भारत में कोई वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी है? और ये भी कि जब एक ही कैंपस में 40 से ज़्यादा देशों के स्टूडेंट्स पढ़ते हों, अलग-अलग राज्यों से, अलग-अलग पृष्ठभूमि से लोग आते हों—तो इतना सब कुछ मैनेज कैसे होता है? ये सारे सवाल हमने पूछे अपनी LPU की Pro-VC, Mrs. Rashmi Mittal से।

    प्रड्यूसर: मानव देव रावत
    साउंड मिक्स: रोहन भारती
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    1 hr and 19 mins
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