Episodes

  • Harappa का Mahabharat Connection, Dwarka पर खुलासा और Buddhism की Violent जड़ें? : Padhaku Nitin
    Oct 29 2026
    इंसान का Time और Space से एक अजीब रिश्ता है। कभी हम भविष्य में झाँकना चाहते हैं, तो कभी अतीत की उन कहानियों को जानना चाहते हैं, जो वक़्त की परतों में कहीं दफ़्न हो गईं। आसमान में हम भविष्य की संभावनाएँ तलाशते हैं, और ज़मीन के नीचे अपने अतीत के सुराग़!Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हम खोलेंगे ज़मीन की परतें और तलाशेंगे भारत के प्राचीन इतिहास से जुड़े कुछ ऐसे सवालों के जवाब, जिन पर आज भी बहस जारी है।हमारे साथ हैं Dr. Sanjay Kumar Manjul, Additional Director General (Archaeology), Archaeological Survey of India (ASI), जिनका दशकों का अनुभव भारत की अलग-अलग Archaeological Sites की खुदाई और प्राचीन सभ्यताओं के अध्ययन से जुड़ा रहा है।करीब तीन साल पहले भी हमारी संजय जी से बातचीत हुई थी। तब चर्चा थी सिनौली की खुदाई की, जहाँ मिले रथों और हथियारों ने प्राचीन भारत के इतिहास को लेकर कई नई बहसों को जन्म दिया था। उस बातचीत में हमने वादा किया था कि अगली बार भारत की दूसरी पुरातात्विक साइट्स पर भी बात करेंगे, जहाँ से इतिहास के कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकते हैं।इस बार हम उसी वादे को पूरा करने लौटे हैं!🔎 इस एपिसोड में जानिए:🔸 Harappan Civilization: हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख Sites से अब तक क्या मिला है और कौन-से सवाल अभी भी अनसुलझे हैं?🔸 Rakhigarhi: राखीगढ़ी की खुदाई से प्राचीन भारत के इतिहास के बारे में क्या पता चला है? यहाँ अभी क्या खोजा जाना बाकी है?🔸 Dwarka: द्वारका में हुई Archaeological Explorations से क्या संकेत मिले हैं? क्या समुद्र के नीचे छिपे साक्ष्य प्राचीन इतिहास की नई परतें खोल सकते हैं?🔸 Elephanta Caves: एलिफ़ेंटा की गुफ़ाओं का इतिहास क्या है और इनकी कला व वास्तुकला हमें उस दौर के बारे में क्या बताती है?🔸 Golconda: गोलकुंडा के इतिहास और वहाँ मौजूद पुरातात्विक साक्ष्यों से हम क्या जान सकते हैं?🔸 Sinauli Excavation: सिनौली में मिले रथों और हथियारों ने प्राचीन भारत को समझने के हमारे नज़रिये पर क्या असर डाला?🔸 Future of Indian Archaeology: भारत में आने वाले समय में कौन-सी खुदाइयाँ हमारे अतीत को समझने का नज़रिया बदल सकती हैं?संजय जी से बातचीत के दौरान हम यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि Archaeologists किसी Site के इतिहास का पता कैसे लगाते हैं, खुदाई में मिले साक्ष्यों की व्याख्या कैसे की जाती है और किन सवालों के जवाब पाने के लिए अभी और Research की ज़रूरत है।संजय जी जल्द ही राखीगढ़ी की Site पर खुदाई के लिए रवाना होने ...
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    1 hr and 16 mins
  • Mahabharat की Real Locations के नीचे क्या दबा मिला? ASI DG Sanjay Manjul Unfiltered : Padhaku Nitin
    Oct 22 2026
    इंसान हमेशा से अपने अतीत को जानने के लिए उत्सुक रहा है। हमारी सभ्यताएँ कैसे विकसित हुईं? हमारे पूर्वज कैसे रहते थे? और ज़मीन की परतों में दफ़्न कौन-से ऐसे राज़ हैं, जो भारत के इतिहास को देखने का हमारा नज़रिया बदल सकते हैं?

    इस बार Padhaku Nitin Podcast में हमारे साथ हैं Archaeological Survey of India (ASI) के Additional Director General (Archaeology), Dr. Sanjay Kumar Manjul। करीब तीन साल पहले संजय जी से हमारी बातचीत सिनौली की खुदाई और वहाँ मिले रथों व हथियारों पर हुई थी। इस बार हम भारत की दूसरी महत्वपूर्ण पुरातात्विक साइट्स की पड़ताल कर रहे हैं।

    इस एपिसोड में जानिए:
    🔸 राखीगढ़ी (Rakhigarhi): हड़प्पा सभ्यता की इस महत्वपूर्ण साइट पर अब तक क्या मिला है? कौन-से रहस्य अब भी अनसुलझे हैं?
    🔸 सिनौली (Sinauli): यहाँ मिले रथों और हथियारों ने प्राचीन भारत के इतिहास को लेकर क्या नई बहसें छेड़ीं?
    🔸 द्वारका (Dwarka): समुद्र के भीतर और आसपास मिले पुरातात्विक साक्ष्य हमें क्या बताते हैं?
    🔸 एलिफ़ेंटा की गुफ़ाएँ (Elephanta Caves): इन प्राचीन गुफ़ाओं का इतिहास और इनके निर्माण से जुड़े सवाल क्या हैं?
    🔸 गोलकुंडा (Golconda): इस ऐतिहासिक क्षेत्र की पुरातात्विक अहमियत क्या है?
    🔸 ASI की खुदाइयाँ: हाल के वर्षों में भारतीय पुरातत्व में क्या नई खोजें हुई हैं और भविष्य में कौन-सी खुदाइयाँ इतिहास की हमारी समझ को बदल सकती हैं?

    दशकों के अनुभव और देश की अलग-अलग पुरातात्विक साइट्स पर काम करने वाले डॉ. संजय कुमार मंजुल के साथ इस बातचीत में समझेंगे कि Archaeology यानी पुरातत्व का विज्ञान कैसे काम करता है, किसी खोज से इतिहास के बारे में हमारी धारणाएँ कैसे बदलती हैं और किसी ऐतिहासिक दावे को प्रमाणित करने के लिए किस तरह के साक्ष्यों की ज़रूरत होती है।

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    1 hr and 12 mins
  • Jantar Mantar की असली कहानी: Raja Jai Singh की Laboratory या Indian Protest का मंदिर? : Padhaku Nitin
    Oct 16 2026
    क्या इंसान को जीने के लिए सिर्फ़ खाना और पानी चाहिए? अगर ऐसा होता, तो न्याय की माँग करते हुए लोग अनशन क्यों करते? भारत में जब भी किसी ने अपने हक़ और इंसाफ़ के लिए आवाज़ उठाई, तो दिल्ली के एक ठिकाने का नाम बार-बार सामने आया — जंतर-मंतर।

    पिछले तीन दशकों में किसान आंदोलन से लेकर पहलवानों के प्रदर्शन, बेरोज़गार युवाओं की माँगों से लेकर निर्भया को इंसाफ़ दिलाने की लड़ाई तक, जंतर-मंतर ने कई आंदोलनों को आवाज़ दी है। लेकिन आज यही जगह एक नई बहस के केंद्र में है। चर्चा है कि यहाँ प्रदर्शनों की इजाज़त पर रोक लग सकती है।

    मगर जिस जंतर-मंतर को हम आज विरोध और प्रतिरोध की जगह के तौर पर जानते हैं, उसकी अपनी कहानी क्या है? इसे किसने बनवाया? इसका नाम जंतर-मंतर क्यों पड़ा? और आख़िर यह है क्या — मंदिर, किला या कोई ऐसी इमारत, जिसका असली मक़सद हम भूल चुके हैं?

    इस एपिसोड में समझेंगे जंतर-मंतर का इतिहास, विज्ञान से उसका हैरतअंगेज़ रिश्ता और उन इमारतों की कहानी, जो इससे प्रेरित होकर बनाई गईं। जानेंगे कि सदियों पहले बने इन विशाल उपकरणों का इस्तेमाल खगोलीय घटनाओं को समझने और समय मापने के लिए कैसे किया जाता था।

    इस ऐतिहासिक सफ़र में हमारे साथ हैं इतिहासकार और वास्तुकार अनीशा मुखर्जी, जो Jantar Mantar, Maharaja Sawai Jai Singh’s Observatory in Delhi की लेखिका हैं।

    देखिए पढ़ाकू नितिन का यह ख़ास एपिसोड और जानिए उस जंतर-मंतर की कहानी, जिसे आज हम विरोध प्रदर्शनों के लिए जानते हैं, लेकिन जिसकी पहचान कभी विज्ञान और खगोलशास्त्र से जुड़ी थी।
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    1 hr and 30 mins
  • Draupadi की बेइज़्ज़ती, Gandhari की Insecurity, Kunti का Virginity वरदान: Padhaku Nitin
    Oct 15 2026
    महाभारत की कहानी को अगर स्त्रियों की नज़र से देखा जाए, तो क्या कुछ बदल जाएगा? क्या द्रौपदी, गांधारी, कुंती और सत्यवती की नज़र से महाभारत की नई परतें खुलती हैं? क्या इस महागाथा की स्त्रियां महज़ निमित्त मात्र थीं, या उनके बिना महाभारत की कहानी अधूरी है?

    इतिहास हो, कोई घटना या कोई किरदार—उसे समझने के लिए अलग-अलग नज़रियों से देखना ज़रूरी है। आचार्य चतुरसेन ने अपने उपन्यास ‘वयं रक्षामः’ में रामायण की कहानी को रावण के नज़रिए से देखा, तो मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कृति ‘यशोधरा’ में बुद्ध की कहानी को उनकी पत्नी यशोधरा की नज़र से प्रस्तुत किया।

    तो फिर महाभारत को उसकी स्त्रियों की नज़र से पढ़ने पर क्या दिखाई देता है? इस महागाथा में द्रौपदी, गांधारी, कुंती, गंगा, अंबा, अंबालिका, सत्यवती, माद्री और उत्तरा जैसी स्त्रियों की अपनी इच्छाएं, संघर्ष, दर्शन और सवाल क्या थे? क्या वे केवल पुरुषों के फैसलों और युद्धों के बीच मौजूद पात्र थीं, या महाभारत की पूरी कहानी को दिशा देने में उनकी भी निर्णायक भूमिका थी?

    पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में बात महाभारत की स्त्रियों की। उनके मन, उनके दर्शन, उनकी पीड़ा, उनके संघर्ष और उनके किरदारों की उन परतों को समझने की कोशिश, जिन पर अक्सर पर्याप्त चर्चा नहीं होती।

    हमारे साथ हैं सुमन केशरी जी, जो पिछले तीन दशकों से महाभारत की स्त्रियों पर लेखन और चिंतन कर रही हैं। उन्होंने इन स्त्रियों पर कविताएं लिखी हैं, नाटक रचे हैं और उनके जीवन-दर्शन को समझने की कोशिश की है। उनके नाटकों में गांधारी, हिडिंबा और सावित्री जैसे पात्रों की दुनिया खुलती है, जबकि उनके कविता-संग्रह ‘निमित्त नहीं’ की कविताएं इन स्त्रियों के अनुभवों और अस्तित्व को समर्पित हैं।

    क्या महाभारत की स्त्रियां सचमुच निमित्त मात्र थीं? या फिर उनकी कहानियों को समझे बिना हम महाभारत को पूरी तरह समझ ही नहीं सकते?

    सुनिए पढ़ाकू नितिन का यह विशेष एपिसोड।
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    1 hr and 59 mins
  • Gandhi Decoded: मुस्लिम तुष्टिकरण, नास्तिकता, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, हिंदुत्व Ft. Purushottam Agrawal : Padhaku Nitin
    Oct 2 2026
    Gandhi पर इतनी किताबें लिखी जा चुकी हैं कि लगता है अब उनके बारे में कुछ नया कहने को बचा ही नहीं। फिर भी आज गांधी या तो बिना सवाल के ‘महात्मा’ हैं, या सोशल मीडिया पर गाली देने के लिए आसान निशाना।

    प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल की किताब ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ इन दोनों आसान रास्तों से अलग गांधी को समझने की कोशिश करती है।


    इस बातचीत में 1947 की वही पुरानी बहस नहीं, बल्कि गांधी के दिमाग, अंतर्विरोध, ज़िद और दर्शन को समझने की कोशिश है।


    क्या गांधी की अहिंसा आम इंसान के बस की थी? क्या उनका आधुनिकता-विरोध एक खूबसूरत भ्रम था? खुद को गर्व से हिंदू कहने वाले गांधी पर मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदू-विरोधी होने के आरोप क्यों लगे? और गांधी की ‘मजबूती’ उनकी ताकत थी या हठधर्मिता?


    इन्हीं असहज सवालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ हैं प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल—पूर्व JNU प्रोफेसर, लेखक, कबीर और भारतीय साहित्य के गहरे अध्येता और UPSC के पूर्व सदस्य।

    आइए, गांधी को न भक्त की तरह, न विरोधी की तरह बल्कि सवाल पूछने वाले की तरह समझने की कोशिश करते हैं।
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    1 hr and 24 mins
  • Gandhi का अंतिम साल: बेटे का धोखा, ब्रह्मचर्य की सनक और Patel से नाराज़गी! : Padhaku Nitin Podcast
    Oct 1 2026
    कोई विचार कालजयी है या नहीं—ये कौन तय करता है? बीतता हुआ समय? आने वाली पीढ़ियाँ? या फिर वो लोग, जो हर नए दौर में उस विचार में अपने समय के सवालों का जवाब ढूंढते हैं?

    अगर कोई विचार समय बीतने के साथ और ज़्यादा relevant होता जाए, और ज़्यादा लोग उससे connect करने लगें—तो क्या इसका मतलब है कि वो विचार महान भी है और ज़रूरी भी?

    हम गांधी के देश में रहते हैं। जब भी कोई आंदोलन होता है, जब भी अहिंसा, सत्याग्रह या नागरिक प्रतिरोध की बात होती है, गांधी का नाम सामने आता है। लेकिन इसके साथ एक सवाल भी उठता है—**आज के समय में गांधी का तरीका कितना relevant है?**

    2 अक्टूबर, गांधी जयंती के आसपास रिकॉर्ड किए गए इस खास एपिसोड में हम इसी सवाल को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

    इस बातचीत की शुरुआत हुई एक किताब से—**‘गांधी का सैंतालीस’**, जिसे लिखा है वरिष्ठ पत्रकार **पुष्यमित्र** ने।

    लेकिन सवाल ये है कि **2026 में 1947 के गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी लगा?**

    1947 में देश आज़ाद हुआ, लेकिन उसी साल भारत ने विभाजन, सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन की भयानक त्रासदी भी देखी। उस दौर में गांधी सत्ता के केंद्र में नहीं, बल्कि उन जगहों पर मौजूद थे जहाँ समाज सबसे ज्यादा टूट रहा था—नोआखाली से लेकर दिल्ली तक।

    पुष्यमित्र ने 1947 के गांधी को फिर से पढ़ने की जरूरत क्यों महसूस की? उस गांधी से आज हम क्या सीख सकते हैं? क्या गांधी का सत्य, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का विचार आज भी उतना ही relevant है? और क्या गांधी को समझने के लिए उनके समर्थकों से ज्यादा उनके आलोचकों को सुनना जरूरी है?

    किताब पढ़ते हुए मेरे मन में एक एहसास आया—**शायद गांधी सिर्फ अपने समर्थकों के नहीं थे। शायद वो अपने आलोचकों के और भी करीब रहना चाहते थे।**

    इन्हीं सवालों और क़िस्सों के साथ यह बातचीत।

    गांधी में जिज्ञासा रखते हैं, तो ये पॉडकास्ट सुनिए।
    गांधी से असहमति रखते हैं, तो ये पॉडकास्ट और भी ज़रूर सुनिए।

    क्योंकि किसी विचार को समझने का सबसे अच्छा तरीका शायद उसे मान लेना नहीं, बल्कि उससे सवाल करना है।
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    1 hr and 24 mins
  • Dhurandhar का आंखों देखा सच, USA का पतन और कैसे होता है Nation का Rise & Fall? : Padhaku Nitin
    Sep 24 2026
    इंसान कई तरीकों से सीखता है. कभी सवाल करके, कभी Experiment करके और कभी दूसरों को देखकर. अब राष्ट्रों का भी यही हिसाब समझ आता है, वो भी ऐसे ही सीखते हैं. और जैसे राष्ट्र सीखता है, वैसे ही राष्ट्र के Citizens भी.
    अगर आपको ये सवाल परेशान करते हैं या जिज्ञासा पैदा करते हैं कि आखिर देश चलता कैसे है, Policy बनती कैसे है? सही विदेश नीति क्या होती है, गलत विदेश नीति क्या होती है? देश अपने Rise पर है या Fall पर? तो ये किताब आपके लिए है….How Nations Fail and the Unmaking of America’s World. इस किताब को लिखा है Former Diplomat Rajiv Dogra ने.

    Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हम Rajiv Dogra ये भी जानेंगे कि भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर वो कौन-सी Secret Deal थी? क्या Trump अमेरिका को पतन की ओर ले जा रहे हैं? China क्या सच में Superpower बन चुका है? और Russia ने आखिर अपना Superpower का दर्जा कैसे खो दिया?
    साथ ही समझेंगे Nations के Rise & Fall, Foreign Policy और Power Politics का वो खेल, जो तय करता है कि कोई देश दुनिया में ऊपर उठता है या धीरे-धीरे अपनी ताकत खो देता है.
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    1 hr and 41 mins
  • 9/11 से जुड़ी Conspiracy Theories का सच क्या है? : Padhaku Nitin
    Sep 11 2026
    11 सितंबर 2001.
    चार commercial planes hijack हुए। दो विमानों ने New York के World Trade Center के Twin Towers को टक्कर मारी। तीसरा विमान Washington D.C. के Pentagon से टकराया। और चौथा विमान Pennsylvania में crash हुआ।
    लेकिन 9/11 सिर्फ एक terrorist attack नहीं था।
    यह एक ऐसा moment था जिसने अमेरिका की foreign policy, Middle East की geopolitics, Afghanistan और Pakistan के साथ उसके रिश्तों और पूरी global security व्यवस्था को बदल दिया।

    इस episode में हम 9/11 को सिर्फ एक घटना की तरह नहीं, बल्कि एक पूरे operation की तरह decode करने की कोशिश करेंगे।

    आखिर उस दिन सुबह से लेकर आखिरी plane crash तक क्या हुआ?

    19 hijackers कौन थे?
    उन्होंने चारों planes पर control कैसे हासिल किया?
    Al-Qaeda ने इतने बड़े और complex operation की planning कैसे की?
    क्या American intelligence agencies को पहले से कुछ warnings मिली थीं?
    Phoenix Memo और August 6 PDB में क्या लिखा था?
    Moussaoui का laptop investigation में इतना महत्वपूर्ण क्यों बना?
    उस दिन NORAD और US air defence system ने क्या किया?
    और सबसे बड़ा सवाल—इतनी सारी warnings के बावजूद attack को रोका क्यों नहीं जा सका?

    हम यह भी समझेंगे कि 9/11 के बाद अमेरिका ने War on Terror क्यों शुरू किया, Afghanistan में Taliban और Al-Qaeda के खिलाफ युद्ध कैसे शुरू हुआ और कुछ साल बाद Iraq War ने Middle East को किस तरह बदल दिया।

    और इस पूरी कहानी में Pakistan की भूमिका क्या थी?

    25 साल बाद पीछे मुड़कर देखें तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 9/11 को क्या हुआ था।

    सवाल यह भी है कि 9/11 के बाद दुनिया क्या बन गई?

    इस episode में Defence Journalist Sandeep Unnithan के साथ हम 9/11 की chronology, planning, intelligence failures, American response और पिछले 25 वर्षों में बदली global geopolitics को समझने की कोशिश करेंगे।

    इस episode में जानिए:

    • 9/11 की पूरी chronology
    • 19 hijackers और Al-Qaeda की planning
    • चारों hijacked flights की कहानी
    • Twin Towers और Pentagon पर हमला कैसे हुआ
    • Phoenix Memo और August 6 PDB क्या थे?
    • Moussaoui और उसके laptop का connection
    • NORAD और अमेरिकी air-defence response
    • Intelligence failure: warnings के बावजूद attack क्यों नहीं रुका?
    • Osama bin Laden और Al-Qaeda का role
    • Afghanistan में War on Terror
    • Pakistan और 9/11 के बाद की geopolitics
    • Iraq War और Middle East पर उसका असर
    • Guantanamo Bay, surveillance और global security
    • और 25 साल बाद—9/11 ने दुनिया को कितना बदल दिया?

    एक attack, चार planes, हजारों lives और उसके बाद शुरू हुई एक ऐसी global war जिसका असर आज भी दुनिया पर दिखाई देता है।

    Producer: Manav Dev Rawat
    Host: Nitin Thakur
    Sound: Suraj Singh
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    51 mins